Tuesday, December 15, 2009

While leaving me alone…


Just leave me alone, If you really hate me

With my silent tears, Which you can’t even see :(

While leaving me alone, Do think for a while

Did I ever asked you anything, more than a smile?


You were the world for me , I saw you all around

A world that crashed, and didn't make a sound

While leaving me alone, Do look into my eyes

You will see my love for you , and for me your lies


I know that you will say, It’s not your mistake

But to just tell you, My love is not a fake

While leaving me alone, You will be lonely too

I may have someone for me, Who will take care of you?


You wanted all the love, and all the care along

And I didn’t even realize, that we went so long

While leaving me alone, Please think what you want

Because you can get something, but everything you can’t…

Monday, December 14, 2009

सवाल ‘?’

वो दिल का धड़कना , वो सांसो का रुकना,

वो पॅल्को का उठना, फिर शर्मा के झुकना

है कहते मोहब्बत नही उनको हमसे,

कोई तो बताए ये क्या माजरा है ?


मोहब्बत है क्या, ये ना मुझको पता थी,

तुम्ही ने सिखाया , तुम्ही ने दिखाया

तुम्हे भूल कर के भी जीता रहू मैं

ये रब की नही, क्या तुम्हारी रज़ा है?


सवालो को मेरे जवाबो का घर दो,

जो कट ना सके, तुम ना ऐसा सफ़र दो

थी मेरी खता क्या, ना मैं जान पाया ,

ज़रा तुम बताओ ये कैसी सज़ा है ?

Thursday, December 10, 2009

भुला दो मुझे


ऐसी सज़ा तुम्हे अब, मैं दे के जा रहा हूँ

कि उम्र भर तड़प कर, भी भूल ना पाओगे

हर एक सितम भुला कर, तुम्हे मु-आफ कर रहा हूँ

मुझे याद करके अपनी, पॅल्को को भीगाओगे


ऐसे चला जाउन्गा, मैं दूर तुमसे हमदम

अपने जहाँ में मुझको, तुम ढूँढ ना पाओगे

सौ राज़ की बातों में, एक राज़ दफ़न रख कर

सारे जहाँ से मेरा, तुम नाम छुपाओगे


बेशक छुपा सकोगे, दुनिया से अपने गम को

झूठी हसी का चेहरा, किस-किस को दिखाओगे

मैं कैसे मान लू कि, तुम इतने संग-ए-दिल हो

कि छोड़ कर मुझे दिल, गैरो से लगाओगे

इंतेहाँ


थी कितने राज़ समेटे हुए, ये आँखें जो पथराई थी

कल सावन क संग बरस गयी, तेरे गम में जो भर आई थी


रोका था जिसको जाने से, माँगा था जिसे दुआओं में

वो छोड गया मुझको ऐसे, पतझड़ की सूनी फ़िज़ाओ में


अब देख मुझे तन्हा-तन्हा, तन्हाई भी डर जाती है

और मुझे हसाने की खातिर ये बिजली भी लहराती है


खोने से पहले डरता था, खोने के बाद भी डरता हूँ

पहले तो मिलनेका गम था, अब ना मिलनेको मरता हूँ


लोगो से तो मैं छुपा भी लू, पर खुद मैं भूल नही पाता

है कोई याद मुझे हर पल, जिसको मैं याद नही आता :’(


Wednesday, December 9, 2009

तेरे बिन

क्यूँ भाग रही है खुद से ही, जो पन्नो पर लिख जाती है

है आग लगी जो इस दिल में, क्या स्याही से बुझ पाती है


मेरे कहे हुए लफ़ज़ो को क्यूँ,दिल में खुद ही दोहराती है

और याद मुझे कर-कर के क्यूँ,यू मन ही मन मुस्काती है

क्यूँ अधरो की मुस्कान कही खामोशी में खो जाती है

जब कभी किसी दिन सखियो से, मेरा नाम नही सुन पाती है


एक दर्द दिया मुझको तूने, खुद तो सौ दर्द भी झेले है

सब साथ तेरे तो चलते हैं , फिर भी क्यूँ जाने अकेले है


शायद तू कभी ये जान सके, कि सब का साथ नही मुमकिन

ये जीवन तेरी खातिर है, और कुच्छ भी नही ये तेरे बिन